Hanuman Chalisa PDF In Hindi – श्री हनुमान चालीसा Lyrics

Hanuman Chalisa PDF – आज इस पोस्ट के जरिए हम आप लोगों को हनुमान चालीसा का इतिहास, हनुमान चालीसा हिंदी में कैसे पढ़ें तथा हनुमान चालीसा का अर्थ हिंदी में क्या होता है इत्यादि के बारे में बताएंगे। तो यदि अब तक आप हनुमान चालीसा का अर्थ व लाभ के बारे में नहीं जानते हैं, तो आप लोगों को यह पोस्ट अंत तक अवश्य पढ़ना चाहिए क्योंकि हम इस पोस्ट में आप लोगों को हनुमान चालीसा का पाठ करने के अनगिनत फायदे बताने वाले हैं।जैसा कि आप जानते हैं, पवन पुत्र हनुमान को शक्ति और बल का प्रतीक माना जाता है।

इतना ही नहीं हनुमान जी भगवान राम के बहुत बड़े भक्त थे और आज दुनिया भर के लोग अपने कष्टों और भय से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा व आराधना करते हैं तथा हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्तों के डर व विकार दूर होते हैं। यदि आप भी हनुमान जी के भक्त हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं,  लेकिन हनुमान चालीसा का अर्थ तथा उनके लाभो से अवगत नहीं है तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें क्योंकि हम यहां हनुमान चालीसा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी आप लोगों को देंगे। तो आइए सबसे पहले हम जानते हैं, कि हनुमान चालीसा के रचयिता कौन हैं तथा इसके पीछे का इतिहास क्या है !!!

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हनुमान चालीसा के रचयिता

Hanuman Chalisa के रचयिता श्री गोस्वामी तुलसीदास जी थे। कहा जाता है, कि कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को मुगल सम्राट अकबर के शासन काल के समय कैद में हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली थी। आपको बता दें, कि सर्वप्रथम हनुमान चालीसा अवधि बोली में लिखी गई थी। 16 वीं शताब्दी में तुलसीदास अवधी बोली के सबसे महान कवि हुआ करते थे। यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है, तो मैं आपको बता दें कि हनुमान चालीसा में कुल 40 चौपाइयां हैं और इसकी रचना के पीछे काफी रोचक कहानी भी छिपी है।

हनुमान चालीसा का इतिहास

दरसल ऐसा कहा जाता है, कि जब मुगल सम्राट अकबर ने कवि तुलसीदास को अपने दरबार में बुलाया तब उनकी मुलाकात वहां टोडरमल और अब्दुल रहीम खान-ए-खाना से हुई। और उन्होंने आपस में काफी देर तक बातचीत की दरअसल वे मुगल सम्राट अकबर की तारीफ में कुछ ग्रंथ लिखवाना चाहते थे। लेकिन श्री गोस्वामी तुलसीदास ने इस काम से साफ इनकार कर दिया, जिस वजह से सम्राट अकबर ने अपने सिपाहियों को हुक्म दिया और तुलसीदास जी को कैद खाने में बंद करवा दिया।

40 दिनों तक तुलसीदास जी फतेहपुर सिकरी के कैद खाने में बंद रहे। फतेहपुर सिकरी का वह कैदखाना चारों ओर से बंदरों से घिरा हुआ था। कैद खाने के अंदर वे सभी बंदर घुस कर वहां मौजूद सम्राट अकबर के तमाम सैनिकों के ऊपर आक्रमण कर उन्हें चोट पहुंचाने लगे। जब इस बात की जानकारी सम्राट अकबर को हुई तब उन्होंने अपने सिपाहियों को हुक्म दिया और तुलसीदास को रिहा कर दिया।  जिसके बाद वे इस पूरे घटनाक्रम से काफी प्रभावित हुए तथा उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की।

हनुमान चालीसा हिंदी में

दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

हनुमान चालीसा के लाभ

ऐसा कहा जाता है कि रोजाना हनुमान चालीसा के चौपाई का पाठ करने से उनके भक्तों की सभी समस्याओं का समाधान होता है। वैसे तो हनुमान चालीसा कोई मंत्र नहीं है, लेकिन इसके 40 चौपाई में इतनी शक्ति है कि अगर कोई व्यक्ति नहाने के बाद 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें तो उसके शरीर में नई ऊर्जा और शक्ति का एहसास होगा और साथ ही साथ जिंदगी के सारे दुख और मुसीबतें भी दूर हो जाएंगी।

कहते हैं, जब इंसान को डर लगता है तो वह हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर देता है और इसके पाठ से मनुष्य निडर हो जाता है उनके अंदर का डर दूर हो जाता है। पुराणों और शास्त्रों के अनुसार यदि आप किसी बीमारी से निजात पाना चाहते हैं, तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा की चौपाई का पाठ अवश्य करना चाहिए क्योंकि रोजाना इसका पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है और नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती है।

इतना ही नहीं शास्त्रों के अनुसार यह भी कहा जाता है, कि जो मनुष्य निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ सही ढंग से करता है तो उसके परमधाम जाने का रास्ता और भी सरल हो जाता है।

निष्कर्ष

आज के इस पोस्ट में हमने आपको हनुमान चालीसा का इतिहास,  हनुमान चालीसा का लाभ तथा हनुमान चालीसा हिंदी में की जानकारी दी है। उम्मीद करते हैं भक्तों को यह Hanuman Chalisa PDF In Hindi – श्री हनुमान चालीसा Lyrics जानकारी पसंद आई होगी, और उन तमाम भक्तों से मेरी यही विनती है। कि इस पोस्ट को जितना हो सके उतना शेयर करें ताकि दुनियाभर के भक्तों को हनुमान चालीसा का अर्थ तथा हनुमान चालीसा के लाभों के बारे में ज्ञान प्राप्त हो सके और वे रोजाना अपने कष्टों तथा भय से छुटकारा पाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ 7 बार अवश्य करें।

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